Aarti

Ambe Maa Ki Aarti

माँ दुर्गा की आरती रोज़ाना सुबह नहा धो कर करनी चाहिए। रोज़ाना  आरती करने वाले व्यक्ति को मन की शांति मिलती है बुरायिओं से दूर भी रहता है।

माँ दुर्गा की आरती करते समय देसी घी का दीपक जलाए यदि देसी घी उपलब्ध ना हो तो कपूर भी इस्तेमाल कर सकते है परन्तु तेल का दिया ना जलाये। 

आरती करते समय माता की मूर्ती या तस्वीर सामने रखे और दीपक को चौदह बार घुमाय जिसमे चार बार चरणों में, दो बार नाभि पर एक बहार मुख पर तथा सात बार पुरे शरीर पर घुमाय। 

नियमित रूप से माँ अम्बे की पूजा करने से माता रानी जल्द ही प्रसन्न होती है और अपने भक्तो की मुराद जल्द ही पूर्ण करती है। 

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Ambe Maa Aarti अम्बे माँ की आरती 

 

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी,
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी।

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को,
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥
॥ॐ जय अम्बे गौरी...

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै,
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥
॥ॐ जय अम्बे गौरी...

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी,
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥
॥ॐ जय अम्बे गौरी...

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती,
कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥
॥ॐ जय अम्बे गौरी...

शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती,
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥
॥ॐ जय अम्बे गौरी...

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे,
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
॥ॐ जय अम्बे गौरी...

ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी,
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥
॥ॐ जय अम्बे गौरी...

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों,
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू॥
॥ॐ जय अम्बे गौरी...

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता,
भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता॥
॥ॐ जय अम्बे गौरी...

भुजा चार अति शोभित, खडग खप्पर धारी,
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥
॥ॐ जय अम्बे गौरी...

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती,
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥
॥ॐ जय अम्बे गौरी...

श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे,
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे॥
॥ॐ जय अम्बे गौरी...

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी,
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी।